सरकारी खर्च बढ़ेगा या नहीं?-Hindi News

सरकारी खर्च बढ़ेगा या नहीं?-Hindi News

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(image) केंद्र सरकार के बजट को लेकर समाज के हर तबके की अपनी उम्मीद होती है। हालांकि पिछले कुछ समय से सरकार के ज्यादातर आर्थिक फैसले बजट से बाहर होते हैं इसलिए अब बजट को लेकर ज्यादा दिलचस्पी नहीं रहती है। जैसे पहले लोगों की नजरें इस बात रहती थीं कि कर में क्या छूट मिलती है और क्या सस्ता, क्या महंगा हुआ। पर अब सस्ता-महंगा का फैसला जीएसटी कौंसिल में हो जाता है। उसके लिए बजट की जरूरत नहीं है। साल में कई बार चीजें सस्ती-महंगी होती हैं। पेट्रोल-डीजल तो हर दिन महंगे होते हैं, आमतौर पर इनकी कीमत बढ़ती ही कम नहीं होती है। सो, बजट में न तो लोगों की दिलचस्पी है और उससे कोई खास उम्मीद।

लेकिन चूंकि वित्त मंत्री ने कहा है कि इस बार वे ऐसा बजट पेश करेंगी, जैसा पहले कभी पेश नहीं हुआ तो थोड़ी दिलचस्पी पैदा हुई है। आर्थिकी के ज्यादातर समझदार लोगों का कहना है कि सरकार को अपना खर्च बढ़ाना चाहिए। महामारी के समय सरकारी खर्च ही एकमात्र ऐसी चीज है, जिससे आर्थिकी में सुधार हो सकता है और समाज के हर तबके को फायदा हो सकता है। सरकार को यह काम पहले ही करना चाहिए था पर उसके राहत पैकेज की घोषणा के समय यह मौका गंवा दिया। दुनिया के अनेक देशों में कोरोना महामारी के बीच स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए खर्च बढ़ाया गया है। इससे स्वास्थ्य सेवाएं तो बेहतर होंगी ही साथ ही बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं से जुड़े लोगों के हाथ में पैसा पहुंचेगा, उनका खर्च बढ़ेगा। लेकिन भारत सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे की बजाय नए संसद भवन और सेंट्रल विस्टा के निर्माण के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है।

बहरहाल, कोरोना महामारी की अवधि में सरकार की राजस्व प्राप्तियों में बड़ी गिरावट आई। सरकार ने अपने खर्च भी कम किए फिर भी वित्तीय घाटा साढ़े नौ फीसदी के करीब पहुंच गया, जबकि पूरे साल का लक्ष्य साढ़े तीन फीसदी का था। वित्तीय घाटे को कम रखने के लिए सरकार ने खर्च नहीं बढ़ाए, जिससे जीडीपी पहली तिमाही में 24 फीसदी और दूसरी में साढ़े सात फीसदी निगेटिव रही। सरकार कहती है कि उसने 20 या 30 लाख करोड़ रुपए का राहत पैकेज दिया। पर पूरक अनुदान तो सरकार ने 2.35 लाख करोड़ रुपए का ही लिया, जिसका मतलब है कि सरकार ने 2.35 लाख रुपए यानी जीडीपी का एक फीसदी ही खर्च किया, जबकि अमेरिका ने अपनी जीडीपी का 10 फीसदी और जापान ने 20 फीसदी खर्च किया है। सो, अब सरकार को फंडामेंटल्स की चिंता छोड़ कर खर्च बढ़ाना चाहिए।

 

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Sujeet Maurya

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