‘लव जिहाद’ पर इतनी बहस क्यों? Hindi News Jago Bhart

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(image) देश में इस समय कोरोना वायरस के केसेज फिर से बढ़ने शुरू हो गए हैं। कम से कम चार राज्यों में केसेज तेजी से बढ़ रहे हैं और सर्दियों में संक्रमण और मरने वालों की संख्या दोनों में इजाफे का अनुमान है। अर्थव्यवस्था का संकट भी सबके सामने है। आर्थिकी के पटरी पर लौटने के सरकार के सारे दावों के बावजूद हकीकत है कि अर्थव्यवस्था का भट्ठा बैठा है और इस पूरे वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद, जीडीपी की दर निगेटिव रहने वाली है। यह बात वित्त मंत्री खुद मान चुकी हैं। इसके बावजूद भारत में किस बात पर चर्चा हो रही है? भारत में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा ‘लव जिहाद’ को लेकर हो रही है, जिसके बारे में सरकार खुद संसद में मान चुकी है कि आधिकारिक रूप से इस किस्म की कोई भी चीज सरकार की नोटिस में नहीं लाई गई है। यानी ‘लव जिहाद’ नाम के किसी अपराध के बारे में सरकार को पता नहीं है। कम से कम अभी तक यह कोई अपराध है भी नहीं लेकिन देश के आधा दर्जन राज्यों में इस पर चर्चा हो रही है और कानून बनाने की तैयारी हो रही है। यह राजनीति का और खास कर चुनावी राजनीति का मुद्दा बन गया है।

असम में अगले साल चुनाव होने वाले हैं। उससे पहले वहां सरकार ने इसे मुद्दा बनाया है। सरकार के सबसे काबिल मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कई दिन प्रेस कांफ्रेंस करके विस्तार से इस बारे में बताया। उन्होंन कहा कि नाम बदल या छद्म पहचान के साथ हिंदू बहन-बेटियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें प्रेम जाल में फंसाया जा रहा है और धर्म परिवर्तन करा कर उनसे शादी की जा रही है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि ऐसी कुछ घटनाएं हुई होंगी लेकिन यह कोई मुख्यधारा का मुद्दा नहीं है और न देश, समाज की सबसे बड़ी समस्याओं में शुमार है। पर हैरानी की बात है कि असम में पांच साल तक राज करने के बाद भाजपा सरकार वहां ‘लव जिहाद’ के मुद्दे पर चुनाव लड़ने वाली है।

पिछले दिनों हरियाणा में एक युवती की हत्या करने की घटना हुई। दिल्ली से सटे फरीदाबाद में एक मुस्लिम युवक ने एक हिंदू युवती के ऊपर शादी की दबाव बनाया और शादी नहीं करने पर उसकी गोली मार कर हत्या कर दी। भाजपा के नेताओं ने राज्य में एक सीट पर हो रहे उपचुनाव में इसे मुद्दा बना दिया। मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने कहा कि सरकार ‘लव जिहाद’ पर कानून बनाने पर विचार कर रही है। हरियाणा के साथ साथ उत्तर प्रदेश की भाजपा की सरकार ने भी इसे लेकर कानून बनाने की बात कही है और कर्नाटक की भाजपा सरकार भी इस पर कानून बनाने के बारे में विचार कर रही है।

अब सोचें, क्या हरियाणा की घटना किस ‘लव जिहाद’ की घटना है? क्या यह कानून व्यवस्था की समस्या नहीं है? एक युवक एक युवती को परेशान कर रहा है, शादी के लिए दबाव डाल रहा है और इनकार करने पर गोली मार दे रहा है तो यह सिर्फ इसलिए ‘लव जिहाद’ का मामला नहीं हो जाता है कि लड़का मुस्लिम है। यह असल में कानून व्यवस्था की समस्या है। यह पुलिस की समस्या है। लड़की का परिवार पहले भी उस युवक की शिकायत कर चुका था।  पहचान छिपा कर लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाने की बात अलग है और फरीदाबाद में हुआ निकिता तोमर हत्याकांड अलग मामला है। लेकिन जहां वोट की राजनीति होती है वहां तार्किक रूप से इन चीजों पर विचार नहीं किया जाता। तभी घटना होने के साथ ही इसे सांप्रदायिक रंग दिया जाने लगा और कानून बनाने की तैयारी शुरू हो गई। कुछ जगहों पर शादी के लिए धर्म परिवर्तन करने पर रोक लगाने का कानून भी बन रहा है।

असल में हरियाणा हो या उत्तर प्रदेश और कर्नाटक हो या असम असली समस्या कानून और व्यवस्था की है। सरकारें कानून व्यवस्था नहीं संभाल पा रही हैं, जिससे अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं। लड़कियों के प्रति अपराध की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में कई जिलों में एक के बाद एक ऐसी घटनाएं हुईं हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश सरकार ने साढ़े तीन साल पहले कमान संभालने के समय ‘एंटी रोमियो स्क्वॉयड’ बनाने का ऐलान किया था वह ‘लव जिहाद’ पर कानून बनाने से पहले का चरण था। अगर ऐस4 कोई स्क्वॉयड बना है तो फिर महिलाओं के प्रति अपराध में इतनी बढ़ोतरी क्यों हो रही है? इस पर ध्यान देने की बजाय सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की बातें और उसके प्रयास ज्यादा हो रहे हैं।

पिछले दिनों एक मशहूर आभूषण ब्रांड के एक विज्ञापन को लेकर भी ‘लव जिहाद’ का मुद्दा उठा था और मजबूरी में कंपनी को विज्ञापन वापस लेना पड़ा था। यह असल में एक सामाजिक मुद्दा है, जो अंतर धार्मिक समूहों के एक साथ रहने पर अक्सर देखने को मिलता है। भारत में अनेक धर्मों के लोग बिल्कुल साथ-साथ रहते हैं। ऐसे में अंतर धार्मिक प्रेम या अंतर धार्मिक शादियों की छिट-पुट घटनाएं होती रहती हैं। हालांकि ऐसी घटनाएं अपवाद ही हैं और समाज में भी इसे कम ही मान्यता मिलती है। फिल्म, क्रिकेट जगत की बातें अलग हैं। वहां समाज के खुलेपन और बहुत ज्यादा नजदीकी की वजह से इस तरह की चीजें ज्यादा देखने को मिलती हैं। पर उससे व्यापक समाज का प्रतिनिधित्व नहीं होता है। सो, कानून बनाने या इस मसले पर राजनीति करने से बेहतर है कि समाज को इस मामले को संभालने देना चाहिए और जहां फरीदाबाद जैसी घटना हो रही है वहां इसे कानून व्यवस्था का मामला मान कर सुलझाया जाना चाहिए।

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Sujeet Maurya

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