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30 Oct 2020, 1:49 AM (GMT)

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Sujeet Maurya Hindi News Reporter Jago Bhart

Sujeet Maurya

3 weeks ago
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न्यायपालिका क्यों है निशाने पर? Jago Bhart

न्यायपालिका क्यों है निशाने पर? Hindi News Jago Bhart Jago Bhart Hindi News

Jago Bhart Hindi News –

(image) भारत की सर्वोच्च न्यायपालिका के चार जजों की साझा प्रेस कांफ्रेंस के बाद न्यायपालिका पर संभवतः सबसे बड़ा हमला हुआ है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज के ऊपर आरोप लगाया है कि वे उनकी सरकार गिराने की साजिश में शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चार जजों के खिलाफ भी इस किस्म के आरोप लगाए हैं और कहा है कि वे पूर्व मुख्यमंत्री व टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू से मिले हुए हैं और उनके साथ मिल कर राज्य सरकार को अस्थिर करने का काम कर रहे हैं। सोचें, यह कैसी अनहोनी बात है कि एक मुख्यमंत्री उच्च न्यायपालिका पर इस किस्म के आरोप लगाए?

जगन मोहन रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिख कर यह आरोप लगाया है और उनके प्रधान सलाहकार अजेया कल्लम ने प्रेस कांफ्रेंस करके ये सारे आरोप दोहराए। जगन मोहन की चिट्ठी में लिखा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के कामकाज में दखल देते हैं। रोस्टर तय कराने यानी किस जज की बेंच में कौन सा केस जाएगा यह तय कराते हैं। उनका आरोप है कि चंद्रबाबू नायडू से जुड़े मामले कुछ खास जजों की बेंच में ही भेजे जाते हैं। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के चार जजों के नाम भी लिखे हैं और कहा है कि जज राज्य सरकार के खिलाफ काम कर रहे हैं।

जगन मोहन ने कई फैसले बताए हैं, जिनमें नायडू के हित में फैसला आया या राज्य सरकार के विरोध में फैसला किया गया। चीफ जस्टिस को लिखी आठ पन्नों की चिट्ठी में जगन मोहन ने यह भी लिखा है कि कई लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच की सिफारिश की गई थी, जिसे अदालत से रूकवा दिया गया। क्या यह महज एक संयोग है कि सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज के खिलाफ एक राज्य सरकार ने ऐसे समय में इतने गंभीर आरोप लगाए हैं, जब वे देश का चीफ जस्टिस बनने से थोड़ी ही दूरी पर हैं?

अगले साल अप्रैल में जस्टिस एसए बोबडे के रिटायर होने के बाद परंपरा के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस एनवी रमन्ना चीफ जस्टिस होंगे। वे करीब डेढ़ साल तक इस पद रहेंगे। उससे ठीक पहले उन्हें लेकर यह विवाद सामने आया है। अभी जगन मोहन के आरोपों के गुण-दोष पर टिप्पणी करने का समय नहीं है लेकिन यह एक गंभीर मसला है और हर पहलू से इसकी जांच होनी चाहिए। यह जांच भी होनी चाहिए कि क्या कोई निहित स्वार्थ जस्टिस रमन्ना को चीफ जस्टिस बनने से रोकना चाहता है? यह भी सवाल है कि इतना असाधारण कदम उठाने से पहले क्या जगन मोहन ने इसके असर के बारे में विचार किया है? वे केंद्र की भाजपा सरकार के करीब माने जाते हैं और पिछले दिनों उन्होंने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, जिसमें राज्य की कुछ परियोजनाओं के बारे में चर्चा हुई थी। सो, यह भी सवाल उठ रहा है कि इस बारे में उन्होंने भाजपा नेताओं को कोई संकेत दिया था या नहीं?

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