अमेरिका से बेचैन है दिल! Hindi News Jago Bhart

Jago Bhart Hindi News –

(image) हाल-फिलहाल ऐसे असंख्य लोग दुनिया में हैं, जो अमेरिका को ले कर लगातार सोच रहे हैं। बेचैन हैं। चिंता में होंगे कि डोनाल्ड ट्रंप हारेंगे या नहीं? अमेरिकी जनता को सद्बुद्धि आएगी या नहीं? वे अपने भविष्य और दुनिया के भविष्य पर सही फैसला करेंगे या नहीं? कोई माने या न माने अपना मानना है कि इस चुनाव में अमेरिका जितना दांव पर है उतनी दुनिया भी है। सन् 2020-21 के मौजूदा वक्त में दुनिया बहुत बरबाद है और इससे अगले कई साल संकट वाले है। महामारी, आर्थिक बरबादी के अलावा चीन और इस्लाम के कट्टर जिहादियों के तात्कालिक खतरे ही इतने गंभीर हैं कि आगे भी यदि डोनाल्ड ट्रंप जैसा मूर्ख, एकलखोरा, सनक-तुनक और झूठ का नेतृत्व दुनिया के थिंकटैंक अमेरिका पर बना रहा तो फिर भगवान मालिक है। तब वैश्विक मंदी, वैश्विक महामारी, वैश्विक इस्लामी चुनौती और चीन की वैश्विक आंकाक्षाओं, वैश्विक मानवाधिकारों, लोकतंत्र और पृथ्वी की जलवायु सेहत आदि की तमाम चिंताओं के आगे वह सामूहिक नेतृत्व बनेगा ही नहीं, जिसकी जरूरत आज पृथ्वी को हर तरह से है।

तभी अमेरिका में कल जो मतदान है वह अमेरिका के लिए जितना महत्वपूर्ण है उतना विश्व के लिए भी है। यों मैंने डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन की पहली टीवी बहस के बाद लिख दिया था कि डोनाल्‍ड ट्रंप हार रहे हैं बावजूद इसके गोरे अमेरिकियों में डोनाल्ड ट्रंप के जरिए ‘महान’ बनने की जो खामोख्याली है वह भी मामूली नहीं है। जब देश विशेष का बहुसंख्यक वर्ग अपनी नब्ज विशेष पर पकड़ से किसी नेता को जादूगर डॉक्टर मान लेता है तो उससे मोहभंग होना आसान नहीं होता है। सन् 2016 में इस्लाम के खतरे में डोनाल्ड ट्रंप ने लोगों की नब्ज इस बारीकी से पकड़ी कि गोरे अमेरिकियों ने मान लिया था कि वे ग्रेट नहीं रहे! इस्लाम के डर में अमेरिकी खुद अपनी निगाह में ही ग्रेट नहीं रहे और वे ट्रंप के इस जुमले में बहक गए कि अमेरिका को फिर ग्रेट, महान बनना है!

वहीं नारा आज भी है। चार साल बाद भी डोनाल्ड ट्रंप जस का जस राग आलापे हुए हैं कि अमेरिका का महान, ग्रेट बनना उन्हीं के जरिए संभव है। उनके हाथों में जादू है, वे महान हैं और उनकी महानता से ही अमेरिका वापिस महान बनेगा। जबकि चार साल का अनुभव उलटा है। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में एकजुटता, सर्वमान्यता खत्म कर दी। अमेरिका दो हिस्सों में याकि ट्रंप समर्थक और ट्रंप विरोधी आबादी में बंटा हुआ है। राजनीति में चौतरफा टकराव है। कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका, मीडिया और समाज सब दो हिस्सों में बंटे हैं। गोरे बनाम काले बनाम एशियाई बनाम लातीनी में आबादी बंटी है तो ईसाई बनाम मुसलमान, प्रवासी बनाम अप्रवासी, अमीर बनाम गरीब याकि रंग-वर्ण-वर्ग के इतने खांचों में अमेरिका बंटा है कि वह अंतरधारा, वह भावना, वह जोश, वह स्पिरिट बुरी तरह सूख गई है, जिससे अमेरिका सिरमौर देश बना था।

डोनाल्‍ड ट्रंप भस्मासुर साबित हैं। उन्होंने अमेरिका को भटका डाला, बरबाद कर डाला। आजादी, मानवाधिकार, लोकतंत्र की नंबर एक वैश्विक मशाल को सवालों के घेरे में ला दिया। इस्लामी उग्रवाद का कुछ नहीं बिगड़ा लेकिन अमेरिका जर्जर और खोखला हो गया। अमेरिका की आत्मा कलुषित हो गई। अमेरिका की वह ताकत छीज गई, जिससे दुनिया प्रेरणा पाती थी, जिससे राक्षस डरते थे और अच्छे लोगों में भरोसा बनता था कि सत्य व मनुष्य की गरिमा, निजता, निडरता और उसके उड़ने के पंखों का ख्याल रखने वाला अमेरिका यदि दुनिया का नंबर एक है तो डरना क्या!

तभी अमेरिका का चुनाव पूरी मानवता, पूरे विश्व के बौदि्धक बल की परीक्षा है। अमेरिका वापिस सामान्य होता है या नहीं, यह इस चुनाव का मूल सवाल है। अमेरिका वापिस पहले जैसा हो जाए तो वह अपने आप महान होगा। अमेरिका की महानता यह है कि अमेरिका अपने आप, अपने पितामहों की बुद्धि, निडरता, विजन, दूरदृष्टि से धीरे-धीरे बना-पका देश है। उसके बने होने, उसके समरथ हुए होने के बीच दुर्भाग्य जो जिहादी खौफ ने, इस्लाम की चिंता ने अमेरिकियों में यह बुद्धिभ्रम बनाया कि डोनाल्ड ट्रंप उससे बचाते हुए अमेरिका को वापिस महान बना देंगे। हां, 9/11 के अनुभव के बाद अमेरिका जैसे भटका तो उसी से अमेरिकियों में यह मतिभ्रम है कि अमेरिका महान नहीं रहा और ट्रंप से महान बन सकेंगे। जबकि अमेरिका बना इस विचार, इस सत्य से है कि मनुष्य और मानव विकास, राष्ट्र विकास तब संभव है जब हर व्यक्ति को आजादी की वे स्थितियां मिली हुई हो, जिनसे व्यक्ति का स्वंयस्फूर्त विकास हो और देश अपने आप उसके साथ विकसित बने। अफ्रीका की गुफा से चिंपांजी बाहर निकला और यदि धीरे-धीरे मानव में परिवर्तित हुआ और फिर क्रमशः विकासवाद में मानव सभ्यता मौजूदा रूप की और बढ़ी तो बीज तथ्य-मंत्र यहीं तो बनता है कि जो भी है वह व्यक्ति की निज चेतना, बुद्धि के सोचने, उसके स्वतंत्रता, निडरता से उड़ते जाने से है। यदि इंसान स्वतंत्र होगा, बुद्धि खुली होगी, सत्य विचारते हुए होगी और उसके बल की निडरता-निर्भीकता में उड़ने को, पुरुषार्थ के समान, कंपीटिटिव अवसर पाए हुए लोग होंगे तो कौम और राष्ट्र-राज्य का निर्माण स्वंयस्फूर्त होते जाना है। उसी से मानव सभ्यता के पंख बने, बन रहे है और बनेंगे।

तभी अमेरिका और यूरोप के वे देश मानव सभ्यता के स्वर्ग हैं जो व्यक्तिगत आजादी, मानवाधिकार की जिद्द से निर्मित है। जहां सरकार माई-बाप नहीं है। नेता याकि प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति और व्यवस्था-अफसर माई-बाप नहीं होते हैं, बल्कि नागरिक जहां अपना मालिक खुद होता है। यों हर लोकतंत्र जैसे भारत का संविधान भी यह घोषणा लिए हुए है कि हम भारत के लोग फलां-फलां संकल्प लेते हैं लेकिन बावजूद इसके जो देश मानव सभ्यता के सिरमौर है, इंसान के लिए स्वर्ग जैसे है उन लोकतंत्र और बाकी लोकतंत्र का फर्क व्यक्ति की सर्वोच्चता, गरिमा और आजादी से है। इस फर्क से ही कुछ देश जिंदादिल लोकतंत्र है, देवलोक बनाए हुए तो बाकी देश लोकतंत्र होते हुए भी मुर्दा कौम वाले है और गुलामी, अंधविश्वास, मूर्खता, असत्य में जीते हुए है।

डोनाल्ड ट्रंप का सबसे बड़ा पाप, उसके भस्मासुर होने का नंबर एक प्रमाण है, जो ट्रंप ने अपनी कथित महानता में बाकी अमेरिकियों को गुलाम बनाना चाहा। अमेरिकियों को बहकाया, अमेरिका की इस प्रकृति, तासीर, सत्व-तत्व को बदलना चाहा कि वे है तो अमेरिका है। उनसे अमेरिका बनेगा। जबकि अमेरिका एक-एक अमेरिकी के सपने, उसकी आजाद ख्याली, उसके पुरुर्षाथ, उसकी निडरता-निर्भयता, बुद्धि-ज्ञान-विज्ञान के सत्य-वैज्ञानिकता से बना है। व्यक्ति की सपनों से, सात समंदर पार करके अमेरिका के अवसर में अमेरिका को घर बनाने के पुरुषार्थ की निज खुद्दारी वाले लोगों से अमेरिका बना है। लेकिन डोनाल्‍ड ट्रंप ने नैरेटिव बनाया कि इस्लाम से डरो, चीन से डरो, दुनिया को बचाने के खर्चों से बचो, प्रवासियों का आना रोको और दुनिया के तानाशाहों को पटा कर अपने स्वार्थ साधो।

मतलब चार साल में अमेरिका को ट्रंप ने ऐसा बदला कि अमेरिका सचमुच अमेरिका नहीं रहा। उसका सत्व-तत्व, उसकी तासीर, उसकी दशा-दिशा सब बदल गई। अमेरिका न केवल कलह, मूर्खता, गृहयुद्ध, बरबादी का प्रतीक बना, बल्कि उस महामारी का भी नंबर एक देश हुआ जो विज्ञान-चिकित्सा-रिस्पांस में सिरमौर रहा है। ऐसे में सोचें कि जो देश अपने को नहीं बचा सका वह दुनिया को क्या बचाएगा? दुनिया को क्या लीडरशीप दे सकेगा? इसलिए मैंने पिछले सप्ताह भी प्रार्थना की थी कि हे प्रभु, अमेरिका को ट्रंप से मुक्ति दिलाओ। आज फिर प्रार्थना है कि हे ईश्वर, अमेरिकियों को सद्बुद्धि दें ताकि वे खूब वोट डाले और अपने आपको मूर्ख-दुष्ट लीडर से मुक्त कर अमेरिका को वापिस सहज-सामान्य और पहले जैसा बनाए। देखते हैं अमेरिकी बुद्धि वापिस कितनी चैतन्य होती है!

var aax_size=”728×90″; var aax_pubname = “nayaindia-21″; var aax_src=”302”; -Jago Bhart Hindi News

Sujeet Maurya

Sujeet Maurya

Send him your best wishes by leaving something on his wall.

Emergency Call

Sujeet Maurya
Sujeet Maurya Sant Kabir Nagar 7053788097
Sujeet Maurya
Sujeet Maurya Khalilabad 7053788097
Sujeet Maurya
Sujeet Maurya Khalilabad 7053788097
Sujeet Maurya
Sujeet Maurya Khalilabad 7053788097
Sujeet Maurya
Sujeet Maurya Khalilabad 7053788097