भूख न लगना बीमारी का संकेत-Hindi News

भूख न लगना बीमारी का संकेत-Hindi News

Hindi News – यदि एक सप्ताह से अधिक समय से भूख नहीं लग रही हैं या धीरे-धीरे भूख कम हो रही है तो इसे हल्के में न लें यह सेहत से जुड़ी किसी गम्भीर समस्या का संकेत हो सकता है। मेडिकल साइंस में इसे एनोरेक्सिया कहते हैं, जब व्यक्ति एनोरेक्सिया का शिकार होता है तो उसे कुछ अन्य लक्षण भी महसूस होते हैं जैसेकि वजन कम होना, थकान और कुपोषण इत्यादि। ऐसे में एनोरेक्सिया की वजह जानना बहुत जरूरी है देर करने से इसकी जड़ में मौजूद बीमारी सेहत के लिये गम्भीर खतरा बन सकती है।

कारण क्या हैं?

भूख न लगने या भूख मरने के कई कारण हैं जैसेकि-

बैक्टीरिया या वायरस: आमतौर पर ऐसा बैक्टीरियल, वायरल या फंगल इंफेक्शन से होता है। इनकी वजह से व्यक्ति को अपर रेसपिरेटरी इंफेक्शन, निमोनिया, गैस्ट्रोइन्टराइटिस, कोलाइटिस, स्किन इंफेक्शन और मेनेन्जाइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। सही इलाज से जब ये बीमारियां ठीक हो जाती हैं तो भूख फिर से सामान्य हो जाती है।

मनोवैज्ञानिक कारण: दुख, उदासी, डिप्रेशन, चिंता (तनाव), बाइपोलर डिस्आर्डर और बूलिमिया की कंडीशन में भूख कम हो जाती है या मर जाती है। इसके अलावा एनोरेक्सिया नरवोसा नामक ईटिंग डिस्आर्डर में भी भूख मरने लगती है क्योंकि इसमें व्यक्ति वजन कम करने के लिये खुद ही कम खाता है या ऐसे तरीके अपनाता है कि उसे कम भूख लगे, इसकी वजह से भूख धीरे-धीरे कम हो जाती है जो बाद में एनोरेक्सिया नरवोसा नामक ईटिंग डिस्आर्डर में तब्दील हो जाती है। इससे व्यक्ति कुपोषित हो जाता है और वजन कम होने से अस्वस्थ महसूस करता है।

गम्भीर बीमारियां: क्रोनिक लीवर डिसीस, किडनी फेलियर, हार्ट फेलियर, हेपेटाइटिस, एनीमिया, क्रोहन डिसीस, एचआईवी, डिमेनशिया और हाइपोथॉयराइडिज्म जैसी बीमारियों के पनपने से भूख कम होने लगती है और व्यक्ति एनोरेक्सिया का शिकार हो जाता है। इनके अलावा कैंसर में भी भूख कम हो जाती है विशेष रूप से यदि बड़ी आंत, पेट, ओवरीज और पेनक्रियाज में कैंसर पनप रहा हो। प्रेगनेन्सी के पहले तीन महीनों में भी कम भूख लगती है। एल्कोहल विड्रॉल सिंड्रोम में भी एनोरेक्सिया की कंडीशन बनती है।

मेडिकेशन: एंटीबॉयोटिक, स्लीपिंग पिल्स, डायूरेटिक्स, कोडीन, मॉरफिन या कीमोथेरेपी ड्रग्स के सेवन से भी भूख मर जाती है। नशीले पदार्थों जैसेकि कोकीन, हेरोइन और एम्फेटामाइन्स का सेवन भी  एनोरेक्सिया बढ़ाता है।

क्या करना चाहिये ऐसे में?

भूख सामान्य तभी हो सकती है जब उसके कारण का इलाज किया जाये, चाहे वह कारण किसी तरह का बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण हो या फिर कोई अन्य बीमारी। यदि किसी मेडिकल कंडीशन  जैसेकि कैंसर या क्रोनिक बीमारी में तो भूख सामान्य करना केवल डाक्टर के हाथ में होता है। ऐसे में कोई भी घरेलू उपचार कारगर नहीं है।

मनोवैज्ञानिक कारणों से कम हुई भूख सामान्य करने के लिये दोस्तों और परिवार वालों के साथ मन पसन्द भोजन करें। रेस्टोरेंट जाकर अच्छे माहौल में पसन्दीदा भोजन करने से धीरे-धीरे भूख सामान्य की जा सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दिन में एक बार भरपेट भोजन करने व दो या तीन बार अल्पाहार से भूख बढ़ायी जा सकती है। दिन में कई बार अल्पाहार, नियमित योगा और हल्के व्यायाम से भी एनोरेक्सिया की समस्या दूर की जा सकती है। कुपोषण की स्थिति में लिक्विड प्रोटीन पेय लें और कभी भी नाश्ता करना न भूलें। खाने में फाइबर की मात्रा कम करें और केला, सेव तथा संतरे का सेवन बढ़ायें। जिंक, थियामाइन, फिश ऑयल और इचीनेशिया युक्त सप्लीमेंट लेना शुरू करें।

मेडिकल केयर और जांच

यदि घरेलू उपचार से भूख सामान्य न हो तो डाक्टर से मिलें। इस सम्बन्ध में डाक्टर आपसे ये प्रश्न पूछ सकता है-

– भूख न लगने के लक्षण कब से शुरू हुए हैं।

– कब ये लक्षण हल्के और गम्भीर होते हैं।

– भूख न लगने की समस्या के दौरान कितना वजन कम हुआ है।

– क्या भूख न लगने के साथ कुछ और लक्षण भी महसूस होते हैं।

इन प्रश्नों के उत्तर सुनने के बाद डाक्टर एब्डोमिन अल्ट्रासाउंड और कम्पलीट ब्लड काउंड, लीवर, थॉयराइड, किडनी फंक्शन की जांच के लिये ब्लड टेस्ट लिख सकते हैं। ज्यादा गम्भीर मामलों में अपर जीआई सीरीज टेस्ट, पेट, इस्फॉगस और छोटी आंत के एक्स-रे के लिये भी कह सकते हैं। जब इन टेस्टों से समस्या का पता नहीं चलता तो दिमाग, चेस्ट, एब्डोमिन या पेल्विस के सीटी स्कैन की जरूरत पड़ती है। एनोरेक्सिया कहीं मादक द्रव्यों के सेवन से तो नहीं है का पता लगाने के लिये यूरीन टेस्ट किया जाता है।

इलाज न कराने से क्या नुकसान?

एनोरेक्सिया की समस्या यदि किसी शार्ट-टर्म कंडीशन की वजह से है तो प्राकृतिक रूप से कुछ समय में अपने आप ही ठीक हो जाती है, यदि ऐसा किसी बीमारी की वजह से है तो इलाज न कराने से यह और गम्भीर हो जाती है। इलाज न कराने की स्थिति में व्यक्ति को बुखार, थकान, धड़कन तेज होना, चिड़चिड़ापन, वजन गिरना और अस्वस्थता महसूस होती है। भूख न लगने के स्थिति लगातार रहने से व्यक्ति कुपोषण का शिकार हो जाता है व शरीर में विटामिन और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने से जानलेवा कंडीशन बन सकती है और वह कोमा में जा सकता है।

ऐसे में एक सप्ताह तक यदि भूख सामान्य न हो तो तुरन्त डाक्टर से मिलें और उसके कहे अनुसार मेडीकेशन तथा डाइट प्लान को अपनायें। किडनी फेल होने की स्थिति में यदि क्रियेटीनाइन 7 से ऊपर हो गया है तो केवल डायलासिस से ही भूख सामान्य होगी, ऐसे यदि डाक्टर डायलासिस के लिये कहे तो उसकी बात मान लें।
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Sujeet Maurya

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