हे प्रभु, ट्रंप से मुक्त हो अमेरिका! Hindi News Jago Bhart

हे प्रभु, ट्रंप से मुक्त हो अमेरिका! Hindi News Jago Bhart

Jago Bhart Hindi News –

(image) ताकि मनुष्य का स्वतंत्रता से, सत्य से, ज्ञान-विज्ञान-साहस-पुरूषार्थ से उड़ते जाना बढ़ता जाए।  पृथ्वी पर शैतानी, मूर्ख, निरंकुश राक्षसों की मनमानी नहीं बढ़े। तामसी वृत्तियों वाले विचारों और झूठ का प्रलय पृथ्वी को लील न ले। पृथ्वी के रावण डरे रहें। वे अंकुश में रहें। दानव धर्म के बीज और दानव समाज बेखौफी की वह आबोहवा न पाए जो दुनिया को इकरंगा, काला बना देना चाहते हैं, जो सौ रंगबिरंगे फूलों की पृथ्वी को रेगिस्तान बना देना चाहते हैं, जो मनुष्य के विकास को मध्यकाल और आदिम-प्रारंभिक अवस्था में पहुंचा देना चाहते हैं!

प्रभु, पृथ्वी बचाएं। डोनाल्ड ट्रंप और उसके आइडिया से मुक्ति दिलाएं नहीं तो आपकी अपनी सृष्टि, अपनी पृथ्वी सूखेगी। ग्लेशियर पिघलेंगे। हवा प्रदूषित होगी और प्रकृति का आपका आकार-प्रकार, रूप उजाड़-विरान वैसे ही होने लगेगा, जैसे ब्रह्मांड में कई ग्रह हैं। पृथ्वी जिंदा है और सहस्त्राबदियों से प्राणियों में एक प्राणी, चिंपाजी ने होमो सेपियंस, मनुष्य रूप में यदि पृथ्वी को देवलोक जैसा बनाया है तो वह  हुआ बुद्धि चेतना, साहस, सत्य और पुरूषार्थ की पूंजी से। उस डीएनए पर उन मूर्खताओं का वास न होने दें, जिससे इंसान बहकावे, झूठ के उस्तरों से अपने को लंगूर बना देने की और चल पड़ा है। मानव सभ्यता को नहीं चाहिए आदिम चिंपाजी का डोनाल्ड ट्रंप अवतार। अमेरिका में वापिस सच्चा इंसान नियंता बने और अमेरिका बना रहे पृथ्वी का कप्तान। पृथ्वी का रक्षक-संरक्षक व रोल मॉडल!

प्रभु, मेरे जैसे पृथ्वी के असंख्य प्राणी मन ही मन इस प्रार्थना में हैं कि अमेरिका बचे। अमेरिकी लोगों की सद्बुद्धि लौटे। वे अपनी उस मौलिकता, उस मूल में, उन मूल्यों और उस विरासत में लौटें, जिससे अमेरिका, अमेरिका बना। वह दुनिया को रोशनी देने वाला हुआ। संचार देने वाला हुआ। हवाई जहाज देने वाला हुआ। अवसर, पुरूषार्थ, पूंजी, निज आजादी का खुला मैदान हुआ व हजारों नोबल, ओलंपिक गोल्डधारकों की जन्मस्थली बना। पृथ्वी का रक्षक-विकासक हुआ। हिटलर जैसे राक्षसों का विनाशक बना तो दिमाग, विचार विशेष की तानाशाह सनक में मनुष्य को पिंजरे का कैदी बना उस पर प्रयोग करने वाले राक्षसों का प्रतिरोधक बना। हां, तमाम तरह के वे असुर, जिनके आगे कई नस्लें, कई कौम, करोड़ों मनुष्य कंपकंपाते हुए और किंतु-परंतु में राक्षसों की शक्ति के भक्त बने रहे जबकि अमेरिका इन सबसे लड़ता हुआ रहा। उन्हें हराता रहा, लगातार बिना डर व बिना संकोच के।

प्रभु, उस अमेरिका में नियंता डोनाल्ड ट्रंप! सोचें दुनिया के तमाम राक्षसों (उत्तर कोरिया का किम जोंग उन, पुतिन, शी जिनफिंग) के साथ गलबहिया व नाचता हुआ (सऊदी अरब के शेखों के साथ) डोनाल्ड ट्रंप उस अमेरिका का वापिस राजा क्यों कर बने, जिस पर सभ्यताओं के संघर्ष से मानवता को बाहर निकालने का बीड़ा है।  जो पृथ्वी के उन तमाम मनुष्यों की टार्च है, जिसके उजाले में मानव अधिकार, मानव गरिमा, मानव आजादी और मानवीयता की असंख्य गंगोत्रियां प्रकाशमय हैं। यदि उस अमेरिका में झूठ-बुद्धिहीनता-मूर्खता का तीन नवंबर 2020 को नए जनादेश के साथ अंधकार चार साल के लिए और घना हुआ तो कहां दिवाली बनेगी? क्या पुतिन, किम जोंग उन, शी जिनफिंग, सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद जैसे उन राक्षसों के यहां नहीं, जो इंसान को इंसान की तरह नहीं, बल्कि पशु माफिक गुलाम रखते हैं!

प्रभु तब पृथ्वी पर बढ़ेगा अनाचार! इंसान को गुलामी की बेड़ियों में बांधने का बढ़ेगा प्रचलन। तलवार लिए तालिबानी अफगानिस्तान को जहां कब्जा लेंगे तो पुतिन-शी जिनफिंग मिल कर वह सब करेंगे, जिससे दुनिया की देव भूमियों में खौफ बने और वे अपने को असहाय पाएं। और तो और अमेरिका भी असहाय, लाचार, बंटा, बरबाद हुआ एवरेस्ट से लुढ़कता होगा। इतिहास गवाह है व वर्तमान कई साक्ष्य लिए हुए है कि सभ्यतागत सिरमौर कौम को यदि राजा मूर्ख मिले, विभाजक-सनकी-अंहकारी-तानाशाह मिले तो झूठ भले फले-फूले, नगाड़े लिए हुए हो लेकिन कौम-देश में ऐसी जड़ता-नासमझी बनेगी कि अच्छी-खासी-चमचमाती सभ्यताएं और देश बंजर-बरबाद होने के रेगिस्तानी सफर की मृग-मरीचिका में सूख जाते हैं। कंगाल बन जाते हैं। फिर अमेरिका से ही, डोनाल्ड ट्रंप के चार सालों में बोए बीज से भी प्रमाणित है कि कैसे महाबली आज वायरस का मारा हुआ है और अमेरिकी ऊर्जा कलह, विभाजन, बीमारी से खोखला गई है।

तब और चार साल! उफ,  क्या इक्कीसवीं सदी अमेरिका की बरबादी की है? मानव सभ्यता के विकास की सिरमौर उपलब्धि अमेरिका पर झूठ-मूर्खता का ताला लगवाने वाली है? अमेरिका के निर्माताओं ने आजादी से उड़ने, अवसर तलाशने, सत्य खोजने, ज्ञान-विज्ञान और समृद्धि याकि सरस्वती-दुर्गा-लक्ष्मी के बुद्धि-साहस-धन की साधना में अमेरिका को जैसे गुंथा उस सब पर तब डोनाल्ड ट्रंप के झूठ का कोमा क्या चार साल बाद अमेरिका का फुलस्टॉप नहीं होगा? और वैसा होना क्या मानवता की त्रासद दास्तां नहीं होगी?

मैं गजब लिख दे रहा हूं। मगर सचमुच मेरे मन की चिंता है कि दुनिया में बुद्धिहीनता का वायरस जैसे फैला है तो कहीं फिर अमेरिकी लोग गलती न कर दें। वैसे मेरा यह आत्मविश्वास ट्रंप-बाइडेन की पहली टीवी बहस से है कि डोनाल्ड ट्रंप हार रहे हैं। लेकिन यदि नस्ली गोरे डोनाल्ड ट्रंप पर वापिस ठप्पा लगाएं तो उसके पीछे डर, असुरक्षा का जो लॉजिक है उसे भी मैं हल्का नहीं मानता हूं। डर मनुष्य में वह अनुभूति है, जिससे बुद्धि कब कुंद-मंद हो जाए और नस्ल कैसे अंधकार में रमे भक्तों में कनवर्ट हो कर हाइबरनेशन में जीने लगे यह हम हिंदुओं का सदियों से चला आ रहा अनुभव है। तब अमेरिका के गोरे भी डोनाल्ड ट्रंप के भय कार्ड से यदि अमेरिका के ग्रेट होने का अंधकार पालें तो वह अस्वभाविक नहीं हैं। आखिर मनुष्य ने ही सत्य, असत्य याकि उजाले-अंधकार याकि राम और रावण का अनुभव, उसके बोध-व्याख्या में अपना सफर साधा हुआ है तो अंधकार भी पार्ट है। असत्य, रावण की ताकत में बहकना भी समय का चक्र है। देवभूमि में राक्षस भी पैदा होते हैं, लोग और देवता भी मायावी रूप के राक्षसों में भटकते हैं सो, अमेरिका भटके तो उस होनी में कोई क्या कर सकता है?

बावजूद इसके अपना विश्वास है, प्रभु से प्रार्थना है अमेरिका का भटकाव खत्म हो। अमेरिका की बुद्धि अपने भस्मासुर को अपने ही हाथों भस्म करे!  है प्रभु ऐसा हो। आप भी अपनी पृथ्वी को बचाएं।

 

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Sujeet Maurya

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