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30 Oct 2020, 1:49 AM (GMT)

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Sujeet Maurya Hindi News Reporter Jago Bhart

Sujeet Maurya

2 weeks ago
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नीतीश भी बड़े ‘मौसम वैज्ञानिक’ हैं! Jago Bhart

नीतीश भी बड़े ‘मौसम वैज्ञानिक’ हैं! Hindi News Jago Bhart Jago Bhart Hindi News

Jago Bhart Hindi News –

(image) लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन हुआ तो कई अखबारों और यहां तक कि बीबीसी जैसी प्रतिष्ठित और अंतरराष्ट्रीय मानकों को मानने वाली वेबसाइट ने उनको राजनीति का मौसम वैज्ञानिक बताते हुए श्रद्धांजलि दी। हालांकि विरोध होने के बाद बीबीसी ने अपनी खबर के शीर्षक से मौसम वैज्ञानिक शब्द हटा दिया। इसके बावजूद बिहार में और सोशल मीडिया में उनको श्रद्धांजलि देते हुए मौसम वैज्ञानिक बताने का सिलसिला चल रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि उनको मौसम वैज्ञानिक का तमगा राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने दिया था, जिनके साथ कई बरसों तक पासवान का तालमेल रहा था। बहरहाल, अगर सिर्फ बिहार के नेताओं के संदर्भ में ही देखें तो सबसे बड़े मौसम वैज्ञानिक पद के लिए रामविलास पासवान को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से कड़ी टक्कर मिलेगी।

नीतीश कुमार पिछले 30 साल में थोड़े से वक्फे को छोड़ दें तो हमेशा सत्ता में रहे हैं, चाहे जैसे रहे हों। वे 1989 में पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए थे और उसी कार्यकाल में वीपी सिंह की सरकार में कृषि राज्य मंत्री बने थे। 1991 में वे फिर से लोकसभा के लिए चुने गए। उस समय बिहार में लालू प्रसाद की सरकार बन गई थी और लालू के सबसे करीबी सलाहकारों में एक नंबर पर नीतीश कुमार थे। यह उनका सत्ता का ही समय था। उन्होंने 1994 में अपनी समता पार्टी बनाई और उसके बाद चार-पांच साल वे सत्ता से बाहर रहे। 1998 में वे चौथी बार लोकसभा के लिए चुने गए और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री बने। तब से 2004 तक वे मंत्री बने रहे। फिर 2005 में वे भाजपा की मदद से बिहार के मुख्यमंत्री बने और अभी तक बने हुए हैं।

उन्होंने नरेंद्र मोदी का विरोध करते हुए भाजपा से तालमेल तोड़ लिया और राजद-कांग्रेस के साथ गठबंधन बना कर 2015 का चुनाव जीते। राजद-कांग्रेस के साथ डेढ़ साल तक सरकार चलाने के बाद उनको लगने लगा कि नरेंद्र मोदी लंबे समय तक सत्ता के शीर्ष पर टिके रहने वाले हैं तो उन्होंने राजद-कांग्रेस से नाता तोड़ लिया और वापस भाजपा के साथ लौट गए। इस चुनाव में एक बार फिर उनके राजनीतिक कौशल की परीक्षा होनी है।

इस तरह से नीतीश कुमार समाजवादी पार्टी, वामपंथी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा चारों के साथ सत्ता में रह चुके हैं और कोई 25-26 साल तक प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सत्ता से जुड़े रहे हैं। इसमें करीब 15 साल मुख्यमंत्री रहे और छह-सात साल तक केंद्रीय मंत्री। मुख्यमंत्री के रूप में लालू प्रसाद के पहले कार्यकाल में वे चार साल तक उनके साथ ही वे सत्ता का सुख लेते रहे थे।

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