सूंघने की शक्ति चली जाना-Hindi News

सूंघने की शक्ति चली जाना-Hindi News

Hindi News – कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति की सूंघने की शक्ति चली जाती है। जब तक शरीर से कोरोना वायरस का लोड कम नहीं होता सूंघने की शक्ति समाप्त रहती है। मेडिकल साइंस में इसे एनोस्मिया और आम बोलचाल की भाषा में स्मेल ब्लाइंडनेस कहते हैं। कुछ लोग किसी खास गंध को महसूस नहीं कर पाते यानी गंध के प्रति संवेदनशीलता कम हो जाती है जिसे  हाइपोस्मिया कहते हैं। सर्दी, जुकाम या एलर्जी से सूंघने की शक्ति चले जाना आमतौर पर गम्भीर बीमारी नहीं मानी जाती लेकिन इससे क्वालिटी ऑफ लाइफ पर असर पड़ता है। इसके मरीज कभी भी खाने का पूरा स्वाद नहीं ले पाते क्योंकि भोजन सूंघ न पाने से उनकी खाने की इच्छा उतनी जाग्रत नहीं होती जितनी एक स्वस्थ व्यक्ति की होती है, इससे कुपोषित होने के चांस बढ़ जाते हैं और वजन गिरने लगता है। बहुत से लोग तो खाने में रूचि न रहने से डिप्रेशन में चले जाते हैं। यदि समय से इसका इलाज न हो या यह लम्बे समय तक बनी रहे तो मरीज का दिमाग या नर्व नकारात्मक रूप से प्रभावित होते हैं जिसका परिणाम ब्रेन ट्यूमर या हैड ट्रोमा के रूप में सामने आता है साथ ही मरीज की सूंघने की शक्ति स्थायी रूप से चली जाती है। आमतौर पर यह बीमारी 40 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र के लोगों को होती है।

कोविड-19 रिलेटेड एनोस्मिया: कोरोना या कोविड-19 से संक्रमित 80-90 प्रतिशत मरीजों की सूंघने और स्वाद की क्षमता खत्म हो जाती है। इसे कोविड-19 का मुख्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण माना गया है, अमेरिका और योरोप में इस सम्बन्ध में हुए शोधों के मुताबिक कोविड-19 संक्रमण से मरीज पर बुखार, खांसी, थकान की अपेक्षा एनोस्मिया का प्रभाव अधिक होता है और उसकी सूंघने की क्षमता चली जाती है। यही कारण है कि कई देशों में एनोस्मिया को एक आधिकारिक कोविड-19 लक्षण के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और कुछ ने संभावित स्क्रीनिंग टूल के रूप में “गंध परीक्षण” को विकसित किया है। इस सम्बन्ध में सन् 2020 में, ग्लोबल कंसोर्टियम फ़ॉर केमोसेंसरी रिसर्च, अंतरराष्ट्रीय स्मेल एंड टेस्ट  शोधकर्ताओं का एक सहयोगी अनुसंधान संगठन, को गंध और संबंधित रसायन विज्ञान के लक्षणों की हानि की जांच के लिए गठित किया गया।

कारण क्या हैं?

सैद्धान्तिक तौर पर एनोस्मिया नाक के अंदरूनी भाग में सूजन या ब्लॉकेज से होता है। कुछ मामलों पाया गया कि ब्रेन और नाक के मध्य सिगनलों का सही आदान-प्रदान न हो पाने से लोग इससे पीड़ित हो गये। अभी तक हुई रिसर्च के मुताबिक यह बीमारी क्रोनिक सीजनल डिसीस जैसेकि साइनस संक्रमण, कॉमन कोल्ड, स्मोकिंग, फ्लू या इनफ्लूएंजा, एलर्जी और क्रोनिक कन्जेशन से होती है। इसके अलावा अपर रेसपाइटरी इंफेक्शन भी इसका बड़ा कारण है। कोल्ड (जुकाम) इसकी आम वजह है इसमें अस्थायी तौर पर मरीज की सूंघने की शक्ति चली जाती है, लेकिन कोल्ड ठीक होते ही एनोस्मिया खुद ही ठीक हो जाती है।

कई बार नाक में वायु प्रवाह मार्ग अवरूद्ध (नेजल ब्लॉकेज) होने से सूंघने पर असर होता है, इसकी वजह ट्यूमर, नेजल पॉलिप्स और नाक में हड्डी बढ़ना या डिफॉरमेशन है।

नाक में किसी तरह की रूकावट और संक्रमण से सूंघने की शक्ति का अस्थायी नुकसान होता है। इसके विपरीत, स्मेल करने की शक्ति का स्थायी नुकसान नाक में मौजूद घ्राण रिसेप्टर न्यूरॉन्स के मरने या मस्तिष्क की चोट से होता है, इसमें घ्राण तंत्रिका और मस्तिष्क के उन क्षेत्रों को नुकसान पहुंचता है जो सूंघने की प्रक्रिया से जुड़े होते हैं। नाक में मौजूद रिसेप्टर एक नर्व के माध्यम से गंध से सम्बन्धित सूचनायें दिमाग को भेजते हैं। इस पाथवे में गड़बड़ी होने से एनोस्मिया होता है। आमतौर पर यह नर्व ओल्ड एज़, एल्जामीर, ब्रेन ट्यूमर, हन्टिंगटन डिसीज, हारमोनल समस्या, अंडरएक्टिव थायराइड, गलत मेडीकेशन, मल्टीपल स्केलोरोसिस, पार्किन्सन डिसीज, न्यूरोडिजेनरेटिव डिसीस, सिजोंफ्रेनिया, मिर्गी, डॉयबिटीज, ब्रेन-हैड इंजरी, कैमिकल एक्सपोजर, ब्रेन सर्जरी, विटामिन डिफीशियेन्सी, कुपोषण, रेडियेशन थेरेपी, स्ट्रोक और लम्बे समय तक शराब पीने से डैमेज हो जाती है।

किसी दुर्घटना से सिर में गम्भीर चोट लगने से भी एनोस्मिया हो सकता है। दुर्लभ मामलों में जेनेटिक कारणों (इन्हेरिट एनोस्मिया) से कुछ बच्चे बिना स्मेल नर्व के पैदा होते हैं इसे कॉन्जेन्टियल एनोस्मिया कहते हैं।

जन्म के समय गंध महसूस करने की क्षमता में कमी, आमतौर पर आनुवंशिक कारकों के कारण जन्मजात एनोस्मिया के रूप में जानी जाती है। जन्मजात एनोस्मिया से पीड़ित रोगी की फैमिली हिस्ट्री में यह जेनेटिक समस्या होने के कारण ही अन्य सदस्य इसे इनहेरिट करते हैं। इससे पता चलता है कि एनोस्मिया एक ऑटोसोमल पैटर्न का अनुसरण कर सकता है।

कई बार वैसोकॉन्स्ट्रिक्टिंग नेजल स्प्रे इस्तेमाल करने से सूंघने की शक्ति स्थायी रूप से चली जाती है, ऐसे नेजल स्प्रे इस्तेमाल करने से सूंघने वाले रिसेप्टर न्यूरॉन्स जो कि नाक के माइक्रोक्रिक्यूलेशन के वासोकॉन्स्ट्रक्शन का कारण हैं को नुकसान पहुंचता है। इस तरह की क्षति और सूंघने की शक्ति समाप्त होने के जोखिम से बचने के लिए, वैसलोकैस्ट्रिस्टिंग नाक स्प्रे का उपयोग तभी करें जब बहुत जरूरी हो और वह भी थोड़े समय के लिए। एलर्जी इत्यादि से बचने के लिये गैर-वैसोकॉन्स्ट्रिक्टिंग स्प्रे उपयोग कर सकते हैं लेकिन डाक्टर द्वारा बतायी गयी अवधि के लिये ही।

नाक के पॉलीप्स के कारण भी एनोस्मिया हो जाता है, ये पॉलीप एलर्जी, साइनसाइटिस की फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों में पाए जाते हैं। सिस्टिक फाइब्रोसिस वाले व्यक्तियों में भी अक्सर नाक में पॉलिप्स विकसित हो जाते हैं।

एमियोडैरोन, हार्ट डिसीज के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवा है। एक शोध से पता चला कि इस दवा से कुछ रोगियों को एनोस्मिया हो गया, हालांकि यह दुर्लभ है। जब इसकी डोज कम की गयी तो उनकी सूंघने की शक्ति वापस आ गयी।

उम्र बढ़ने के साथ नर्व फाइबर घटने और दिमाग के स्मेल करने से जुड़े भाग में मौजूद ओलफैक्टरी बल्ब के रिसेप्टर कमजोर पड़ने व नाक के सेन्सरी सेल्स नष्ट होने से एनोस्मिया हो जाता है। इसके अलावा सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम के कमजोर पड़ने से भी सूंघने की शक्ति समाप्त होने लगती है।

तम्बाकू का धुआं, टॉक्सिक गंध और नाक से लिये जाने वाले ड्रग्स भी नाक के रिसेप्टर नष्ट कर देते  हैं जिससे एनोस्मिया का रिस्क बढ़ता है। दातों में आयी खराबी भी सूंघने की शक्ति  कम करती है। एनोस्मिया कभी-कभी कुछ दिमागी बीमारियों जैसेकि पार्किंसंस और अल्जाइमर का प्रारंभिक संकेत भी है।

एनोस्मिया पुष्टि कैसे?

व्यक्ति की सूंघने की क्षमता कितनी गयी है इसे मापना कठिन है। इस सम्बन्ध में डाक्टर मरीज से कुछ प्रश्न पूछते हैं और तात्कालिक लक्षणों का आकलन करने के साथ नाक की गहन जांच तथा फिजिकल जांच करते हैं। साथ ही हैल्थ और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेते हैं। वे यह जानने का प्रयास करते हैं कि मरीज कुछ खास तरह की गंध नहीं सूंघ पाता या फिर किसी भी गंध को सूंघ पाने में अक्षम है। साथ ही यह भी पता लगाते हैं कि मरीज की इस अक्षमता का उसके खाने के स्वाद पर क्या असर हो रहा है। इसके पश्चात नाक की अंदरूनी कंडीशन और ब्रेन से उसके कनेक्शन की सटीक जानकारी हासिल करने के लिये सिर और दिमाग का सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन तथा स्कल एक्स-रे व नाक की अंदरूनी हालत जानने के लिये इंडोस्कोपी की जाती है।

एनोस्मिया से पीड़ित रोगियों पर हुई एक रिसर्च में जब उनके दोनों नथुनों का परीक्षण किया गया तो एनोस्मिया का पता नहीं चला। जब प्रत्येक नथुने का अलग-अलग परीक्षण हुआ तो पता चला कि गंध सूंघने की क्षमता केवल एक नथुने की प्रभावित हुई। इससे पता चला कि बहुत से लोग केवल एकपक्षीय एनोस्मिया से ही ग्रस्त होते हैं।

इलाज क्या है?

एनोस्मिया का इलाज उसके कारण के अनुसार किया जाता है। यदि कोल्ड, एलर्जी या साइनस इंफेक्शन से सूंघने की शक्ति गयी है तो यह समस्या इनके ठीक होते ही अपने आप कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। यदि इन बीमारियों के ठीक होने के बाद भी यह ठीक न हो तो डाक्टर से सलाह लें। यदि एनोस्मिया की समस्या नाक में इरीटेशन से है तो इसके इलाज के लिये सर्दी-खासी की दवा, एंटीथिस्टेमाइंस, स्टेराइड नेजल स्प्रे, बैक्टीरियल संक्रमण रोकने के लिये एंटीबॉयोटिक्स की जरूरत पड़ती है। यदि यह समस्या एलर्जी से है तो नेजल स्प्रे के साथ मास्क लगायें और एलर्जी वाली वस्तुओं से दूर रहें तथा स्मोकिंग छोड़ दें।

जब नाक के अंदरूनी भाग में सूजन से नेजल पैसेज में रूकावट आती है तो इसका इलाज सूजन कम करने वाली दवाओं से होता है। ऐसा पुरानी मेनिनजाइटिस और न्यूरोसाइफिलिस के कारण होता है इसकी वजह से लम्बे समय तक इंट्राक्रैनील दबाब बढ़ा रहता है। कुछ मामलों में ऐसा सिलियोपैथी अर्थात प्राइमरी सिलेरी डिस्केनेसिया के कारण होता है।

यदि एनोस्मिया नाक में किसी रूकावट जैसेकि हड्डी बढ़ना या नेजल पॉलिप्स इत्यादि से है तो डाक्टर सर्जरी से इस रूकावट को दूर करते हैं। साइनस जमने से एनोस्मिया होने पर इसका सबसे अच्छा इलाज नेती करना है। जन्मजात एनाज्मिया का कोई इलाज नहीं है।

जिंक ग्लूकोनेट सप्लीमेंट और कोस्टीकोराइड्स इसके इलाज में कारगर पाये गये हैं। आजकल स्मेल ट्रेनिंग थेरेपी से भी इसका इलाज होता है इसमें चार महीने तक दिन में दो बार कुछ मिनटों का प्रशिक्षण दिया जाता है।

घरेलू उपचार

यदि सूंघकर गंध पहचानना सर्दी जुकाम या किसी एलर्जी की वजह से खत्म हुआ है, तो इन नुस्खों को अपना सकते हैं-

ऐंटीहिस्टामीन यानी नाक में डालने वाली नमकीन बूंदों या नाक में डाले जाने वाले स्टेरॉयड स्प्रे का इस्तेमाल करें।

पानी में दो बूंद यूकेलिप्टस का तेल डालकर भाप लें।

लहसुन की दो-तीन तुरियां पानी में उबालकर इसे गुनगुना होने दें और दिन में दो बार पियें।

एक कप पानी में एक नीबू निचोड़कर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर गुनगुना करके पियें।

टेस्ट को और जल्द रिस्टोर करने में नीबू का आचार भी लाभकारी है।

पुदीने के पत्तों को पानी में उबाल कर दिन में दो बार पियें।

अदरक की चाय पियें।

एक कप पानी में पिपरमिन्ट की 15 पत्तियां और एक चम्मच शहद मिलाकर चाय बनाकर धीरे-घीरे सिप करें।

कढ़ी पत्ते की 20 पत्तियां लेकर एक गिलास पानी में 30 मिनट या एक इससे ज्यादा देर तक भिगोकर रखें फिर इस पानी को दिन में दो बार पियें।

नाक में हल्के गुन-गुने कैस्टर ऑयल की दो बूंदे दिन में दो बार डालने से अंदरूनी सूजन कम होती है और स्मेल करने कि शक्ति जल्द रिस्टोर होती है, कैस्टर ऑयल में मौजूद रिसीनोयेलिक एसिड में एंटी-इनफ्लेमेटरी गुण होते हैं।

मुंह में कोकोनट ऑयल या तिल का तेल एक घूंट भरें और 10-15 मिनट तक मुंह में रखने के बाद कुल्ला करें।

एक या दो चम्मच अजवाइन के बीजों को पतले सूती कपड़े में बांधकर पोटली बनायें और इसे दिन में हर आधे घंटे के अन्तराल से सूंघते रहें।

आधा चम्मच दालीचीनी पाउडर एक चमच्च शहद में मिलाकर इस पेस्ट को दिन में दो बार जीभ पर दस मिनट के लिये रखें।

एनोस्मिया और जीवन

इसका सबसे कॉमन कॉम्प्लीकेशन मरीज की भोजन में रूचि समाप्त होना है जिसकी वजह से वह धीरे-धीरे कुपोषित होकर कमजोर हो जाता है। इस बीमारी से ग्रस्त लोगों को कभी भी यह पता नहीं चलता कि आग से खाना या कोई वस्तु जल तो नहीं रही। ऐसे में घर में फॉयर एलार्म होना जरूरी है। ऐसे लोगों को खाना स्टोर करने समय बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है अन्यथा वे बासी खाने की स्मेल न कर पाने के कारण खराब खाद्य पदार्थ खाने से बीमार पड़ सकते हैं। घर में गैस इत्यादि लीक होने पर इन्हें पता ही नहीं चलता। ऐसे लोगों को इन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिये-

– खाने पर तारीख का लेबल लगाकर फ्रिज में रखें।

– किचन में प्रयोग होने वाले क्लीनिंग कैमिकलों की एक्सपायरी डेट की जांच करें।

– गैस के बजाय इलेक्ट्रिक स्टोव को प्रयोग करें।
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