इस बार सेना सर्दियों में डटी रहेगी Hindi News Jago Bhart

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(image) चीन की सेना के साथ भारत के सैन्य कमांडर की आठवें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही। चीन किसी हाल में अपनी जगह से पीछे हटने को तैयार नहीं है। भारत के सैन्य कमांडरों का जोर इस बात पर है कि ज्यादा ऊंचाई वाली जगहों से दोनों सेनाएं पीछे हटें। ज्यादा ऊंचाई वाली जगहों पर जोर इसलिए है क्योंकि सर्दियां शुरू हो गई हैं और ऐसे मौसम में ऊंचाई पर सेना की तैनाती बहुत मुश्किल काम होता है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि चीन इस बात पर राजी नहीं हो रहा है। आठवें दौर की वार्ता के बाद नई दिल्ली और बीजिंग में जारी बयान में कहा गया कि दोनों पक्ष जल्दी ही फिर वार्ता करेंगे। पर सवाल है कि जल्दी वार्ता करके क्या हासिल होना है?

जब आठ दौर की वार्ता के बाद बात आगे नहीं बढ़ी है और दोनों सेनाओं के पीछे हटने पर सहमति नहीं बनी है तो नौंवीं वार्ता में क्या हो जाएगा? इससे पहले जिन बातों पर सहमति बन गई थी, चीन उनसे भी पीछे हट गया है। इसलिए भारत को उसकी मंशा पर चिंता है। सो, सर्दियों में भारत किसी हाल में सेना हटाने के बारे में नहीं सोच सकती है। ध्यान रहे इससे पहले 1962 में भी चीन ने ऐसे ही गर्मियों से गतिरोध बढ़ाना शुरू किया था और सर्दियों में हमला कर दिया था। उसने अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं की है। उलटे उसने वास्तविक नियंत्रण  रेखा पर कई जगह तैनाती बढ़ा दी है।

जवाब में भारत ने भी अपनी तैनाती बढ़ाई है। भारत ने टी 21 और टी 72 टैंक तैनात किए हैं और हाल ही में फ्रांस से आए राफेल लड़ाकू विमानों की तैनाती भी की गई है। भारत भले वार्ता से कूटनीतिक दबाव से चीन को पीछे हटाने में सफल नहीं हो पा रहा है पर अपनी तैयारियों में भारत पीछे नहीं है। सो, इस बार सैनिकों के लिए सर्दियां लंबी होने वाली हैं। उन्हें पूरी सर्दी ऊंचाई वाली चौकियों पर तैनात रहना होगा और चीन पर नजर रखनी होगी। भारतीय सेना ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। वैसे भी भारतीय सेना के जवानों और अधिकारियों को अत्यधिक ऊंचाई वाली जगहों पर पांच से छह साल की अनिवार्य तैनाती की जाती है। इसलिए वे इन जगहों और बेहद ठंड की स्थितियों में भी डटे रहने में सक्षम हैं। भारतीय सेना ने अत्यधिक ऊंचाई वाली जगहों पर लड़ाई भी सफलतापूर्वक लड़ी है।

बहरहाल, चीन की मंशा को देखते हुए भारत को अतिरिक्त तैयारी करनी पड़ी है। 15 हजार फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर अगले कुछ दिनों में तापमान माइनस 25 डिग्री हो जाएगा। कई इलाकों में अभी से बर्फ गिरने की खबरें हैं। सो, मौसम बहुत खराब भी हो सकता है। इन हालात को ध्यान में रखते हुए सेना ने तैयारी की है। इस बार अमेरिका से बहुत ज्यादा ठंड के समय पहने जाने वाले 11 हजार सूट्स खरीदे गए हैं। इसके अलावा भी कई दूसरी जगहों से ठंड में पहने जाने वाले सूट्स, डिब्बाबंद भोजन, हथियार, गोला-बारूद और किसी भी मौसम में अबाधित संचार के साधन जुटाए गए हैं। आमतौर पर पिछले कई सालों से इसकी जरूरत नहीं पड़ती थी। सर्दियों में सेना ऊपर से उतर जाती है। हालांकि अब भी अत्यधिक ऊंचाई पर चीन की तरफ से कोई हलचल नहीं दिख रही है पर भारत की सेना कोई जोखिम लेने को तैयार नहीं है। इसलिए सेना की तैनाती भी रहेगी और सारा साजो-सामान भी जमा रहेगा। मौसम खराब होने की स्थिति में जिन चौकियों का संपर्क नीचे से कट जाता है उनके लिए अतिरिक्त उपाय किए गए हैं।

गौरतलब है कि अप्रैल के अंत से लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध चल रहा है और 15 जून की रात को गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों की हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। उसके बाद से ही दोनों देशों के बीच सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता हो रही है। छह नवंबर को आठवें दौर की वार्ता हुई। लेकिन इसमें टैंक और दूसरे सशस्त्र वाहन आदि पीछे हटाने पर सहमति नहीं बन पाई। अब दोनों पक्षों की ओर से कहा जा रहा है कि जल्दी ही इस बारे में सहमति बनेगी। लेकिन अब सहमति बनाने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि सर्दियां शुरू हो गई हैं और थोड़े दिन के बाद सैनिकों की ऊपर से वापसी भी मुश्किल हो जाएगी।

चीन गलवान घाटी के अलावा गोगरा, हॉटस्प्रिंग, पैंगोंग झील और देपसांग प्लेन में अपनी सेना जमा कर बैठा है। 15 जून की घटना के बाद गलवान घाटी में जरूर चीन की सेना थोड़ा पीछे हटी पर बाकी जगह पहले की तरह दोनों फौजें आमने सामने हैं। चीन ने एलएसी को लेकर बनी पुरानी सहमति का उल्लंघन करके अपनी सेना आगे बढ़ाई है। इसलिए भी भारत को उसकी मंशा पर संदेह है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने पैंगोंग झील के पास फिंगर चार की रिजलाइन और फिंगर पांच को लगभग पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया है। वह तमाम प्रयासों के बावजूद वहां से पीछे नहीं हट रहा है।

पिछले कुछ दिनों से भारत और चीन की सैन्य वार्ताओं में कूटनीतिक अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं पर उससे भी कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। इस बीच 10 नवंबर को शंघाई सहयोगी संगठन, एससीओ की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग गतिरोध शुरू होने के बाद पहली बार आमने सामने होंगे। हालांकि सम्मेलन वर्चुअल होना है पर दोनों एक दूसरे के आमने सामने आएंगे। इस बैठक में अगर भारत-चीन गतिरोध को लेकर कुछ चर्चा होती है तो उसके बाद होने वाली सैन्य वार्ता में बात आगे बढ़ सकती है। और बात तभी आगे बढ़ेगी, जब चीन ने मई के बाद से जिन सेक्टर में घुसपैठ की है वहां से पीछे हटे।

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Sujeet Maurya

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