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30 Oct 2020, 12:48 PM (GMT)

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Sujeet Maurya Hindi News Reporter Jago Bhart

Sujeet Maurya

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जीएसटी का विवाद अदालत में जाएगा! Jago Bhart

जीएसटी का विवाद अदालत में जाएगा! Hindi News Jago Bhart Jago Bhart Hindi News

Jago Bhart Hindi News –

(image) सरकार के लिए मुश्किल खड़ी करने वाले कई अन्य मसलों की तरह जीएसटी का विवाद भी अदालत में जाता दिख रहा है। जीएसटी कौंसिल की लगातार तीसरी बैठक में मुआवजे के भुगतान पर सहमति नहीं बन पाई है। विपक्षी पार्टियों के शासन वाले राज्यों के वित्त मंत्री आम सहमति से फैसला कराने का दबाव बना रहे हैं, जबकि सरकार बिना वोटिंग कराए अपने समर्थन वाले राज्यों के बहुमत से फैसला कराने के पक्ष में है। इस वजह से दस दिन के भीतर हुई दो बैठकों में सहमति नहीं बन पाई।

अब कांग्रेस का कहना है कि 12 अक्टूबर को हुई बैठक वित्त मंत्री अचानक छोड़ कर चली गईं। ध्यान रहे वित्त मंत्री ही जीएसटी कौंसिल की अध्यक्ष हैं। पी चिदंबरम ने दावा किया है कि कांग्रेस और दूसरे विपक्षी राज्यों के वित्त मंत्री चाहते थे कि कौंसिल में राज्यों के दिए जाने वाले मुआवजे के बारे में फैसला हो। विपक्ष के सुझाए थे। पहला सुझाव किसी भी किस्म का विवाद सुलझाने के लिए एक कमेटी बनाने का था और दूसरा मुआवजा के भरपाई के लिए केंद्र की ओर से कर्ज लेने के दो विकल्पों से इतर एक रास्ता खोजने के लिए समिति बनाने का था। चिदंबरम का कहना है कि इस पर चर्चा की बजाय वित्त मंत्री अचानक मीटिंग छोड़ कर चली गईं।

दूसरी ओर केंद्र सरकार ने राज्यों में विभाजन करा दिया है। भाजपा और उसके समर्थकों जिन 21 राज्यों ने कर्ज के विकल्प को चुनने पर हामी भरी थी उन्हें केंद्र सरकार ने कर्ज लेने की अनुमति दे दी है। 97 हजार करोड़ रुपए के कुल मुआवजा बकाए में से इन राज्यों का हिस्सा 67 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा बनता है। अगर ये राज्य अपने हिस्से के कंपनसेशन सेस के बदले में कर्ज लेकर बकाए की भरपाई कर लेते हैं तो विपक्षी राज्य अलग-थलग पड़ेंगे। तभी कम से कम दो राज्यों पंजाब और केरल ने सुप्रीम कोर्ट में जाने का संकेत दिया है।

पर सवाल है कि सुप्रीम कोर्ट से भी विपक्ष को क्या हासिल होगा? देश के सबसे बड़े कानूनी अधिकारी अटॉर्नी जनरल ने सरकार को राय दी है कि वह वसूली नहीं हो पाने पर राज्यों को मुआवजे का भुगतान करने को बाध्य नहीं है। अदालत में सरकार यहीं लाइन लेगी। पिछले कई बरसों से ऐसा हो रहा है कि जिन मामलों में सरकार उलझ जाती है वे मामले अदालत में जाते हैं और वहां से आमतौर पर सरकार को राहत मिल जाती है। तभी विपक्ष का अदालत में जाना भी बहुत उम्मीद जगाने वाला नहीं है। अगर वहां से मुआवजे के भुगतन के लिए कर्ज के दो विकल्पों में से एक चुनने को कहा जाता है तो राज्यों के लिए मुश्किल होगी। फिर जीएसटी का पूरी मकसद ही फेल होगा। राज्यों ने कर वसूलने का अपना अधिकार केंद्र के हाथों में इसलिए दिया था कि वह हर साल 14 फीसदी ज्यादा कर वसूल कर देगी और अगर ऐसा नहीं कर पाएगी तो उसकी भरपाई करेगी। केंद्र सरकार ऐसा नहीं करती है तो जीएसटी का क्या मतलब रह जाएगा?

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