डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) हो सकता है जानलेवा-Hindi News

Hindi News – (image) शरीर में पानी का जरूरी स्तर बहुत कम हो जाने से डिहाइड्रेशन होता है, यह स्थिति इतनी खतरनाक होती है कि समय से इलाज न मिलने पर जान भी जा सकती है। वैसे तो कोई भी डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकता है लेकिन बच्चे और बूढ़े सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। […]

डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) हो सकता है जानलेवा-Hindi News

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(image) शरीर में पानी का जरूरी स्तर बहुत कम हो जाने से डिहाइड्रेशन होता है, यह स्थिति इतनी खतरनाक होती है कि समय से इलाज न मिलने पर जान भी जा सकती है। वैसे तो कोई भी डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकता है लेकिन बच्चे और बूढ़े सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गनाइजेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में प्रतिवर्ष 30 से 40 लाख लोगों की मृत्यु डिहाइड्रेशन या इससे पैदा हुए कॉम्प्लीकेशन्स से होती है। अभी तक हुए वैज्ञानिक शोधों के अनुसार पुरूषों को 124 आउन्स (करीब 3.5 लीटर) और महिलाओं को 96 आउन्स (2.8 लीटर) पानी प्रतिदिन पीना चाहिये। लेकिन एथलीट या उच्च तापमान वाले वातावरण में रहने वालों के लिये यह मात्रा और ज्यादा होती है। जब हमारे शरीर में पानी की मात्रा ज्यादा कम हो जाती है तो शरीर के अंग, सेल्स और टिश्यू (ऊतक) सही ढंग से काम करने में असमर्थ हो जाते हैं जिससे जटिलतायें पैदा होती हैं और स्वास्थ्य बिगड़ने लगता  है। डिहाइड्रेशन दो तरह का होता है- हल्का और गम्भीर। हल्के डिहाइड्रेशन में इलाज घर पर हो सकता है लेकिन गम्भीर स्थिति में अस्पताल की जरूरत पड़ती है।

किन्हें रहता है ज्यादा रिस्क?

  1. उच्च तापमान (किसान, कन्सट्रेक्शन वर्कर, मैकेनिक, खदान वर्कर इत्यादि) में काम करने वाले लोग।
  2. आउटडोर एक्टीविटीज में लिप्त रहने वाले लोग।
  3. नवजात शिशु और छोटे बच्चे।
  4. अधिक उम्र वाले वयस्क।
  5. किसी क्रोनिक डिसीस के शिकार लोग।
  6. खिलाड़ी जैसेकि धावक, साइक्लिस्ट, फुटबाल और हॉकी प्लेयर।
  7. ज्यादा ऊंचाई पर रहने वाले लोग।

क्यों होता है डिहाइड्रेशन?

हमारा शरीर लगातार पसीने, सांस छोड़ने और मल-मूत्र के जरिये पानी बाहर निकालता है, शरीर से निकले इस पानी की यदि साथ-साथ भरपाई न हो तो व्यक्ति को डिहाइड्रेशन हो जाता है। आमतौर पर डिहाइड्रेशन इन वजहों से होता है-

पसीना: पसीने से हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है। तापमान बढ़ने पर शरीर में मौजूद पसीना बनाने वाली ग्रन्थियां सक्रिय होकर नमी रिलीज करती हैं, इस नमी के वाष्पीकरण से शरीर के लिये जरूरी तापमान मेन्टेन रहता है। इसके अलावा पसीने से त्वचा हाइड्रेट रहने के साथ शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स (सोडियम,पोटेशियम, क्लोराइड) भी संतुलित रहते हैं। पसीने में शरीर से बाहर निकलने वाला द्रव्य, पानी और नमक का मिश्रण होता है। जब बहुत अधिक पसीना आता है तो शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है, मेडिकल साइंस में इसे हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं।

बीमारी: डायरिया या अन्य किसी बीमारी से जब लगातार उल्टी और दस्त लग जाते हैं तो डिहाइड्रेशन की स्थिति बनती है। इसमें पानी के साथ शरीर के सुचारू संचालन के लिये जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकल जाते हैं। इलेक्ट्रोलाइट्स वे मिनरल्स (खनिज) हैं जिन्हें हमारा शरीर मांसपेशियों को नियन्त्रित करने, ब्लड केमिस्ट्री बनाये रखने और अंगों के संचालन में इस्तेमाल करता है। ये इलेक्ट्रोलाइट्स हमारे रक्त, यूरीन और शरीर के अन्य द्रव्यों में मौजूद रहते हैं। डायरिया (उल्टी या दस्त) से शरीर में पानी के साथ इनकी कमी होने पर स्ट्रोक व कोमा की स्थिति बन जाती है।

बुखार: इस कंडीशन में शरीर अपना तापमान मेन्टेन करने के लिये त्वचा के माध्यम से बहुत अधिक मात्रा में पानी प्रयोग करता है जिससे शरीर में पानी की मात्रा घटने लगती है, इस प्रक्रिया में बहुत अधिक पसीना आने से मरीज डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है।

यूरीनेशन: यह शरीर से टॉक्सिक (जहरीले) तत्वों को बाहर निकालने का स्वाभाविक तरीका है, लेकिन कुछ कंडीशन्स में ज्यादा पेशाब आने से बहुत अधिक पानी शरीर से निकल जाता है और डिहाइड्रेशन की नौबत आ जाती है। प्रोस्टेट के मरीजों को बार-बार पेशाब आता है, जब यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है तो बहुत ज्यादा मात्रा में यूरीन पास होने के कारण शरीर से पानी के साथ सोडियम, पोटेशियम और क्लोराइड जैसे इलेक्ट्रोलाइट निकल जाते हैं जिससे व्यक्ति बेहोश हो जाता है। ऐसे में शरीर में पानी के साथ सोडियम और पोटेशियम का ट्रांस-फ्यूजन न किया जाये तो व्यक्ति कोमा में जा सकता है। यह बात याद रखें कि हमारे दिमाग को एक्टिव रखने में सोडियम और पोटेशियम दोनों की अहम भूमिका है और इनकी कमी दिमाग को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकती है। ऐसे में बहुत से लोगों के दिमाग में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि यदि नमक इतना ही जरूरी है तो डॉक्टर हमेशा कम नमक खाने की सलाह क्यों देते हैं? इसके अलावा अधिक नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ने के साथ हार्ट सम्बन्धी समस्यायें भी होने लगती हैं। इसका उत्तर है कि हमारे शरीर को जितना नमक चाहिये (चाहे वह सोडियम हो या पोटेशियम) वह सब्जियों और फलों में मौजूद होता है। खाने में हम जो नमक ऊपर से डालकर खाते हैं वह अपने स्वाद के लिये होता है न कि स्वास्थ्य के लिये। इसलिये डॉक्टर हमेशा खाने में ऊपर से नमक डालने को मना करते हैं फल और सब्जियां खाने को नहीं।

क्या लक्षण उभरते हैं डिहाइड्रेशन में?

डिहाइड्रेशन के लक्षण इस बात पर निर्भर होते हैं कि व्यक्ति गम्भीर डिहाइड्रेशन का शिकार है या हल्के। हल्के डिहाइड्रेशन की स्थिति में थकान, मुंह सूखना, प्यास लगना, पेशाब कम आना या न आना, स्किन में खुश्की, आंसू कम बनना, कब्ज, सिरदर्द और चक्कर आने जैसे लक्षण उभरते हैं।

यदि डिहाइड्रेशन गम्भीर है तो बहुत ज्यादा प्यास, कम पसीना, लो ब्लड प्रेशर,  तेज दिल की धड़कन तीव्र,  सांस तेज चलना, स्किन सूखना, गहरे रंग का पेशाब आना और आंखें धसने जैसे लक्षण उभरते हैं। गम्भीर डिहाइड्रेशन, मेडिकल इमरजेन्सी की कंडीशन है ऐसे में मरीज को तुरन्त निकट के अस्पताल ले जायें।

मेडिकल इमरजेंसी: बच्चों और अधिक उम्र के वयस्कों में चाहे हल्का डिहाइड्रेशन हो या गम्भीर तुरन्त मेडिकल अटेन्शन दें और एक भी लक्षण नजर आते ही नमक व चीनी का घोल देना शुरू कर दें। व्यक्ति चाहे किसी भी उम्र का हो यदि उसे गम्भीर डायरिया है,  मल में खून आ रहा है, डायरिया हुए तीन दिन हो गये हैं और वह भ्रमित महसूस कर रहा है तो उसे तुरन्त डाक्टर के पास ले जायें अन्यथा जान जा सकती है या वह कोमा में जा सकता है।

कैसे पुष्टि होती है डिहाइड्रेशन की?

डिहाइड्रेशन का पता मरीज की कंडीशन देखकर चल जाता है। लगातार उल्टी व दस्त होने का मतलब ही डिहाइड्रेशन है। मरीज की फिजिकल कंडीशन देखने के बाद डाक्टर हृदय गति और ब्लड प्रेशर जांचते हैं, यदि ब्लड प्रेशर कम और दिल की धड़कन तेज है तो यह डिहाइड्रेशन की पुष्टि का प्रमाण है। इसके पश्चात डाक्टर, ब्लड टेस्ट से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के स्तर की जांच करते हैं, इलेक्ट्रोलाइड्स का गिरता स्तर भी इसकी पुष्टि करता है।

डिहाइड्रेशन का सबसे बुरा असर किडनी पर होता है, इससे शरीर में क्रियेटीनाइन का स्तर बढ़ जाता है।  केएफटी (किडनी पैनल टैस्ट) नामक ब्लड टेस्ट से क्रियेटीनाइन की जांच करते हैं। स्वस्थ व्यक्ति में इसका अधिकतम स्तर 1.2 होना चाहिये। डिहाइड्रेशन से जब शरीर में क्रियेटीनाइन बढ़ता है तो इसका अर्थ है कि मरीज को एक्यूट किडनी इंजरी हुयी है। ज्यादातर लोगों में यह डिहाइड्रेशन ठीक होने के 30 दिन बाद अपने आप ठीक हो जाती है लेकिन कुछ मामलों में इसे ठीक करने के लिये डायलासिस करना पड़ता है। बहुत गम्भीर डिहाइड्रेशन में डायलासिस की जरूरत तब होती है जब क्रियेटीनाइन का स्तर 4 से ऊपर हो गया हो।

यूरीन एनालिसिस टेस्ट से पता लगाते हैं कि पेशाब में कोई बैक्टीरिया तो नहीं है, क्योंकि डायरिया की कंडीशन बैक्टीरिया से बनती है। यूरीन का डार्क कलर भी डिहाइड्रेशन का संकेत है, डार्क कलर के साथ मुंह सूखना, कब्ज और चक्कर आने जैसे लक्षण हों तो इससे डिहाइड्रेशन की पुष्टि होती है।

क्या करें डिहाइड्रेशन होने पर?

इसके उपचार में तीन तरीके इस्तेमाल होते हैं- रिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी पूरी करना), इलेक्ट्रोलाइट्स रिप्लेसमेंट और डायरिया (उल्टी व दस्त रोकना) का इलाज।

रिहाइड्रेशन: इसके तहत शरीर में पानी की कमी पूरी करते हैं। उल्टी और दस्त की कंडीशन में बहुत से लोगों के लिये पानी पीकर इस कमी को पूरा करना सम्भव नहीं होता तो इन्ट्रावीनस विधि का प्रयोग करते हैं। इसमें एक छोटी आईवी ट्यूब को हाथ की वेन में इंसर्ट करके इलेक्ट्रोलाइट्स मिले पानी को शरीर में चढ़ाते हैं।

जो लोग पानी पीने में सक्षम हैं उन्हें इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन थोड़ी-थोड़ी देर में पीने को दिया जाता है। जब बच्चों को इस तरह से रिहाइड्रेट करते हैं तो इलेक्ट्रोलाइट्स वाले पानी में थोड़ा ग्लूकोज (चीनी) भी मिला देते हैं। मेडिकल टर्म में इसे ओआरएस का घोल कहते हैं। यदि इस घोल को घर में बनाना हो तो एक लीटर पानी में आधा चम्मच नमक और 6 चम्मच चीनी मिलायें। नमक और चीनी की मात्रा इससे अधिक नहीं होनी चाहिये, इनकी अधिक मात्रा मरीज के लिये नुकसानदायक होती है। डिहाइड्रेशन में सोडा, एल्कोहल, मीठे ड्रिंक और कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन न करें।

क्या कॉम्प्लीकेशन हो सकते हैं डिहाइड्रेशन से?

यदि डिहाइड्रेशन का इलाज न कराया जाये तो इससे हीटस्ट्रोक, हीट-क्रैम्प. हीट-एक्स़ारसन, इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी से दौरे (सीजर्स), कोमा, लो ब्लड वॉल्यूम (रक्त की कमी) और किडनी फेलियर जैसे कॉम्प्लीकेशन्स हो सकते हैं।

कैसे बचें डिहाइड्रेशन से?

यदि तबियत खराब हो रही है तो पानी का इनटेक बढ़ा दें। विशेष रूप से उल्टी और दस्त (डायरिया) की स्थिति में ज्यादा पानी पीने का प्रयास करें। यदि सादा पानी पीने में दिक्कत हो तो ओआरएस का घोल बनाकर पीना शुरू कर दें। ऐसा तब तक चालू रखें जब तक मेडिकल एड न मिल जाये।

यदि आप रोजाना व्यायाम करने या खेलने जाते हैं तो ऐसी किसी भी एक्टीविटी से पहले पानी पियें। वर्कआउट के दौरान रेगुलर इंटरवल में पानी पीते रहें। यदि पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स मिलें हैं तो यह और भी बेहतर है। वर्कआउट समाप्त होने के बाद भी पानी पीना जरूरी है।

गर्मी के मौसम में ऐसे वस्त्र पहनें जो ठंडक प्रदान करते हों। आमतौर पर ऐसे में कॉटन से बने कपड़े ठीक रहते हैं। खिलाड़ियों और वर्कआउट करने वालों के लिये आजकल विशेष कपड़े से बने वस्त्र  उपलब्ध हैं जो ठंडक पंहुचाने के साथ शरीर से गर्मी भी दूर रखते हैं। यदि आपकी जीवनशैली ज्यादा एक्टिव नहीं है तो भी हर घंटे कम से कम एक कप पानी जरूर पियें।

नजरिया

जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ नहीं मिलते तभी डिहाइड्रेशन होता है। चाहे व्यायाम हो, गर्म मौसम हो, बीमारी हो सभी स्थितियों में शरीर में पानी की कमी ही इसका मूल कारण है, इसलिये जैसेही इसके शुरूआती लक्षण महसूस हों तुरन्त पानी का इनटेक बढ़ा दें। ऐसे में ओआरएस का घोल बच्चों और बड़ों सभी के लिये लाभदायक है, इसलिये सादा पानी पीने के बजाय इस घोल को पीना शुरू  करें और डाक्टर के पास जायें। डिहाइड्रेशन को हल्के में न लें और न ही यह सोचें कि ओआरएस का घोल पीने से यह ठीक हो जायेगा, इससे केवल पानी की कमी ठीक होती है, यदि यह समस्या डायरिया (बैक्टीरियल संक्रमण) से है तो इसके लिये दवा लेना जरूरी है।

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