कोरोना की दूसरी लहर शुरू! Hindi News Jago Bhart

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(image) भारत में क्या कोरोना वायरस की दूसरी लहर शुरू हो गई? देश की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े और इस वायरस महामारी से लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा रहे डॉक्टरों का कहना है कि देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर शुरू हो गई। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि दिल्ली में कोरोना वायरस की दूसरी लहर शुरू हो सकती है। दिल्ली में संक्रमण के केसेज में लगातार हो रही बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से दिल्ली में संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं, उस तरह से देश के दूसरे हिस्सों में भी बढ़ सकते हैं। ध्यान रहे दिल्ली में तीसरी बार संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। इसलिए इसे संक्रमण की तीसरी लहर कहा जा रहा है। दिल्ली में सितंबर में केसेज काफी कम हो गए थे, जिसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली में संक्रमण की दूसरी लहर का पीक आकर चला गया। इस लिहाज से यह तीसरी लहर होनी चाहिए पर डॉक्टर गुलेरिया का कहना है कि यह तीसरी नहीं दूसरी लहर ही है, जिसमें थोड़ा उतार-चढ़ाव हुआ है।

बहरहाल, लहर दूसरी हो या तीसरी यह बहस का विषय नहीं है। हकीकत यह है कि दिल्ली में केसेज लगातार बढ़ रहे हैं और साथ ही संक्रमण से मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। पहली और सबसे तेज लहर में भी दिल्ली में एक दिन में संक्रमण के पांच हजार मामले नहीं आए थे। लेकिन अब लगातार छह दिन तक साढ़े पांच हजार के आसपास मामले आए हैं। अक्टूबर के महीने में दिल्ली में संक्रमण का आंकड़ा बढ़ा है। इसलिए समझना मुश्किल नहीं है कि अनलॉक के चौथे-पांचवें चरण में धार्मिक स्थलों से लेकर सिनेम हॉल और होटल-बार से लेकर साप्ताहिक बाजार आदि खोलने के फैसलों और त्योहार के सीजन की वजह से ऐसा हुआ है।

दुर्गापूजा और नवरात्रि का त्योहार ऐसा नहीं है कि सिर्फ दिल्ली में मनाया जाता है। देश के लगभग सभी हिस्सों में यह त्योहार मनाया जाता है। खास कर पूर्वी भारत के राज्यों में और पश्चिम में गुजरात में। लेकिन पश्चिम बंगाल को छोड़ कर बाकी कहीं से मामले बढ़ने की खबर नहीं आ रही है। पश्चिम बंगाल में भी मामले बहुत कंट्रोल में बढ़ रहे हैं। यह बहुत दिलचस्प है कि हर दिन 59 से 61 लोगों के बीच मौत हो रही है और 39 सौ से चार हजार के बीच मामले आ रहे हैं। बंगाल की तरह बिहार में भी दुर्गापूजा बड़े पैमाने पर मनाई जाती है। पर बिहार में हर दिन एक हजार से नीचे आंकड़े रह रहे हैं। ऊपर से वहां चुनाव भी चल रहा है और सबको दिख रहा है कि कहीं भी कोरोना के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। तभी बंगाल और बिहार के आंकड़ों पर संदेह होता है।

ऊपर से बिहार में संक्रमितों के ठीक होने की दर भी हैरान करने वाली है। दुनिया के तमाम विकसित और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं वाले देशों में कोरोना के मरीजों के ठीक होने में समय लग रहा है। पर बिहार में लोग फटाफट ठीक हो जा रहे हैं। चुनाव लड़ रहे कई नेता तो दो दिन में कोरोना पॉजिटिव से निगेटिव हो रहे हैं। यह दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए रहस्य की बात हो सकती है। इसी रहस्यमय चिकित्सा प्रणाली के दम पर बिहार में 95 फीसदी से ज्यादा लोगों की कोरोना से रिकवरी हो रही है। सोचें, अस्पताल, लैब और डॉक्टर-नर्स की संख्या के मामले में बिहार देश का सबसे फिसड्डी राज्य है पर इसके जैसा रिकवरी रेट देश के एक-दो राज्यों में ही दिख रहा है। पता नहीं क्यों इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर इसे अपना मॉडल राज्य नहीं बना रहा है?

बहरहाल, अब बिहार चुनाव समापन की ओर बढ़ रहा है और त्योहारों का सीजन भी अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। सात नवंबर को बिहार में आखिरी चरण का मतदान है और 14 नवंबर को दिवाली है। उसके बाद बिहार और पूर्वांचल के इलाकों में 20-21 नवंबर को छठ का त्योहार होगा, जिसके बाद हिंदुओं के बड़े त्योहार पूरे हो जाएंगे। ऐसा लग रहा है कि जैसे जैसे त्योहारों के समापन की समय नजदीक आ रहा है और बिहार चुनाव समापन की ओर बढ़ रहा है, देश में कोरोना की दूसरी लहर का माहौल बनने लगा है। कहा जाने लगा है कि दूसरी लहर आ रही है। आंकड़ों में ऊपर-नीचे होने लगा है। अब तक संक्रमितों की संख्या तेजी से कम हो रही थी पर अब संक्रमण घटने की दर धीमी हो गई है। एक्टिव केसेज भी तेजी से कम हो रहे थे पर अब उसकी रफ्तार भी धीमी हो गई है।

तीन राज्यों- दिल्ली, केरल और पश्चिम बंगाल के बहाने कोरोना वायरस की दूसरी लहर की चर्चा तेज हो गई है। इससे यह संदेह होता है कि कहीं सब कुछ आंकड़ों की बाजीगरी तो नहीं था, जिससे देश में कोरोना संक्रमण कम होने का हल्ला मचा था? बहरहाल, अब अगर कोरोना की दूसरी लहर आ रही है तो यह सवाल उठता है कि सरकार इससे निपटने की क्या तैयारी कर रही है? यूरोप के देशों में दूसरी लहर आई है तो फिर से लॉकडाउन लगाया जा रहा है।

फ्रांस के बाद ब्रिटेन ने भी अपने यहां एक महीने का लॉकडाउन लागू कर दिया है। लेकिन भारत में इसका उलटा हो रहा है। भारत में अनलॉक का छठा चरण घोषित हो गया है और अब तक देश के कई राज्यों में स्कूल, कॉलेज और दूसरे शिक्षण संस्थान भी खोले जाने लगे हैं। इससे ऐसा लग रहा है कि केंद्र हो या राज्य सरकारें हों उनको अब लोगों के संक्रमित होने और मरने की वैसी परवाह नहीं है, जैसी यूरोपीय देशों की सरकारें कर रही हैं। अब भारत में सरकारों को यह लग रहा है कि लोग बीमार होते हैं तो हों या मरते हैं तो मरें, अर्थव्यवस्था को बचाए रखना ज्यादा जरूरी है। बिहार चुनाव का नतीजा सरकारों की सोच बदलने वाला साबित हो सकता है।

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Sujeet Maurya

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