विधानसभा तो हर बार त्रिशंकु होती है Hindi News Jago Bhart

विधानसभा तो हर बार त्रिशंकु होती है Hindi News Jago Bhart

Jago Bhart Hindi News –

(image) तमाम मीडिया समूह और राजनीतिक जानकार ज्ञान दे रहे हैं कि बिहार में इस बार त्रिशंकु विधानसभा बनेगी। लेकिन असल में इसमें कोई नई बात नहीं है। बिहार में हर बार त्रिशंकु विधानसभा ही बनती है। पिछले 30 साल के इतिहास में एक बार 1995 के चुनाव को छोड़ दें कभी किसी को बहुमत नहीं मिला। 1990 से लेकर सात बार चुनाव हो चुके हैं और यह आठवां विधानसभा चुनाव चल रहा है। पहले के सात चुनावों में सिर्फ एक बार 1995 में जनता दल को को पूर्ण बहुमत मिला था। तब लालू प्रसाद मुख्यमंत्री थे और उनका भूराबाल साफ करो की राजनीति चरम पर थी। तब पिछड़ों की गोलबंदी से जनता दल को साधारण बहुमत मिल पाया था। वह भी कोई प्रचंड बहुमत नहीं था।

सो, इस बार अगर विधानसभा त्रिशंकु बनती है तो वह कोई हैरान करने वाली बात नहीं है। हैरानी की बात तब होगी, जब विधानसभा इस तरह से त्रिशंकु हो कि सरकार बनाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़े या ऐसा हो, जिसमें सब मुख्यमंत्री पद की दावेदारी करें। जमीनी स्तर से मिल रही रिपोर्ट के मुताबिक इस बार के चुनाव में ऐसा ही जनादेश आ सकता है, जिसमें तीन पार्टियां मुख्यमंत्री पद की दावेदारी कर सकती हैं। नीतीश कुमार के खिलाफ तमाम नाराजगी के बावजूद उनकी पार्टी को इतनी सीटें आ सकती हैं उनके बगैर सरकार नहीं बनेगी। तब महाराष्ट्र जैसे कोई बेहद दिलचस्प समीकरण देखने को मिल सकता है। यहीं कारण है कि भाजपा, जदयू और राजद तीनों अपने अपने नेता के मुख्यमंत्री बनने की संभावना को लेकर पूरे भरोसे में हैं।

var aax_size=”728×90″; var aax_pubname = “nayaindia-21″; var aax_src=”302”; -Jago Bhart Hindi News

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(image) तमाम मीडिया समूह और राजनीतिक जानकार ज्ञान दे रहे हैं कि बिहार में इस बार त्रिशंकु विधानसभा बनेगी। लेकिन असल में इसमें कोई नई बात नहीं है। बिहार में हर बार त्रिशंकु विधानसभा ही बनती है। पिछले 30 साल के इतिहास में एक बार 1995 के चुनाव को छोड़ दें कभी किसी को बहुमत नहीं मिला। 1990 से लेकर सात बार चुनाव हो चुके हैं और यह आठवां विधानसभा चुनाव चल रहा है। पहले के सात चुनावों में सिर्फ एक बार 1995 में जनता दल को को पूर्ण बहुमत मिला था। तब लालू प्रसाद मुख्यमंत्री थे और उनका भूराबाल साफ करो की राजनीति चरम पर थी। तब पिछड़ों की गोलबंदी से जनता दल को साधारण बहुमत मिल पाया था। वह भी कोई प्रचंड बहुमत नहीं था।

सो, इस बार अगर विधानसभा त्रिशंकु बनती है तो वह कोई हैरान करने वाली बात नहीं है। हैरानी की बात तब होगी, जब विधानसभा इस तरह से त्रिशंकु हो कि सरकार बनाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़े या ऐसा हो, जिसमें सब मुख्यमंत्री पद की दावेदारी करें। जमीनी स्तर से मिल रही रिपोर्ट के मुताबिक इस बार के चुनाव में ऐसा ही जनादेश आ सकता है, जिसमें तीन पार्टियां मुख्यमंत्री पद की दावेदारी कर सकती हैं। नीतीश कुमार के खिलाफ तमाम नाराजगी के बावजूद उनकी पार्टी को इतनी सीटें आ सकती हैं उनके बगैर सरकार नहीं बनेगी। तब महाराष्ट्र जैसे कोई बेहद दिलचस्प समीकरण देखने को मिल सकता है। यहीं कारण है कि भाजपा, जदयू और राजद तीनों अपने अपने नेता के मुख्यमंत्री बनने की संभावना को लेकर पूरे भरोसे में हैं।

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Sujeet Maurya

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